एक नया ब्लॉग

दिल से आवाज़ आई - आज कल आस-पास सभी उदास रहते हैं. आँखे अब हंसती नहीं ... बच्चे भी गुमसुम से रहने लगे हैं... क्या ज़माना गुज़र गया है हंसी का? या अब हम तितलियों की तरह उसका पीछा नहीं करते? क्यूँ किसी की  आँखों में आंसू देख कर हम आँखे ही बंद कर लेते हैं?

कुछ दोस्तों ने एक पहल की है - खुशियाँ बांटने की. आईये किसी भी तरह इस सुंदर पहल का हिस्सा हम भी बने. अपने आस - पास लोगों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरें और इसे ब्लॉग पर सबके साथ बाटे - http://letsshareasmile.blogspot.com/  :)

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