गदल - रांगेय राघव
गदल कहानी पढ़ी। रांगेय राघव की कहानी। एक ऐसे चरित्र की कहानी जिसका चरित्र चित्रण उतना ही मुश्किल है, जितना खुद का। उसे, जैसी वो है, वैसे देखने पर लगता है मानो, खुद ही को किसी और की नज़रों से देख रहे हों। इसीलिए, उसे जैसी वो है, वैसे देखना मुश्किल है , बेहद मुश्किल। 45 वर्ष की गदल , पति के मर जाने पर अपना पूरा कुनबा छोड़ , 32 साल के मौनी की घर जा बैठती है। मन में है , देवर को नीचा दिखाना है। वही देवर जिसमें इतना गुर्दा नहीं की , भाई के चले जाने के बाद भाभी को अपना ले ... जिसके नाम की रोटी तोड़ता है उसे दुनिया के सामने अपना लेने में भला क्या बुराई ... लेकिन देवर दौढी ढीठ है , डरपोक है , लोग क्या कहेंगे यही सोच सोच कर मरता रहता है। गदल औरत है लेकिन किसी की फ़िक्र नहीं करती। वही करती है जो अपने दिल में जानती है की सही है। वही करती है जो उसे करना होता है। औरत क्या चाहती है , तुम यही पूछते हो न। गर औरत तुम्हे अपना मानती है , तो चाहती है की तुम हक़ जताओ , फिर चाहे दो थप्पड़ ही मार कर क्यूँ न जताना पड़े। मौनी गुस्से में पूछता है , "म...
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ReplyDeleteSame intensed
the pain
on which
I balm' d
to soothe
Im sry didnt get you this time?
ReplyDeleteकिसी कवी की ये कविता याद दिलाती रचना है
ReplyDelete"किसी मौसम का झोंका था
जो इस दीवार पर लटकी हुई तस्वीर तिरछी कर गया है
गए सावन में ये दीवारें यूं सीली नहीं थी
न जाने इस दफा क्यूँ इनमें सीलन आ गयी है
दरारे पद गए है और सीलन इस तरह बैठती है
जैसे खुश्क रुखसारों पे गीले आंसू चलते हैं"
एक शब्द इन पंक्तियों के लिए... गहराई!
ReplyDeletePrateek thanks :)
ReplyDeleteBut I guess your onw word is suitable for the lines shared by Anonymous. :)
Maine jo likha hai wo to paani pr beh rahe tinke jaisa hai , gehraai ki to baat hi alag hoti hai.
Thanks Anon... meri rachna aisi kavita yaad dila den , mere liye bahut badi baat hai.
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