न यंहा सुकूँ है न वहां चैन
मैं खुद को खोती जा रही हूँ ़ ़

शायद कभी खुद को पाया भी था 

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

गदल - रांगेय राघव

गोदान - एक विचार

उफ़!!... तुम भी न.