triveni

एक रोज़ उसने मुझे प्यार से दी
महीन चांदी के सितारों वाली वो चुनर

और आज तलक में उसमें से चांदनी छानती हूँ

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

गदल - रांगेय राघव

गोदान - एक विचार

उफ़!!... तुम भी न.