Sunday, October 3, 2010

सिल लिए हैं मैंने होंठ अपने अब



मेरे शब्दों को तुम पसंद नहीं,
और तुम्हे मेरे शब्द.
सिल लिए हैं मैंने  होंठ अपने अब. 

चुप रहते रहते सारे, 
कहीं खो गए हैं शब्द,
सिल लिए हैं मैंने होंठ अपने अब.

दीवारे ताकती हैं मुझे ,
तकिये पर टपकते हैं शब्द,
सिल लिए हैं मैंने होंठ अपने अब.



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