Tuesday, June 28, 2011

पता नहीं

"कभी कभी फैसले लेना कितना मुश्किल हो जाता है न... खासकर जब दो चीज़ों में से एक को चुनना हो - एक गलत और दूसरा सिर्फ एक एहसास ... जो न सही लगता हो न गलत...
बताओ न अगर तुम्हे चुनना हो तो तुम किसे चुनोगी?" 
"मैं?... पता नहीं."
"अरे... कुछ भी पूछो तो तुम्हारा एक ही जवाब होता है - पता नहीं." 
मुस्कान जोरों से हंस दी. "मैं तो ठहरी एक बेवकूफ तुम्ही बता दो न."
"उम्... मैं ?... अगर एहसास विश्वास पर टिका हो तो एहसास को चुनुँगा." 
"और अगर विश्वास ठहरता न हो तो?"
विशाल ने एक पल मुस्कान कि आँखों में झाँका , मानो कुछ अनकहा पढ़ लेना चाहता हो... मुस्कान उसी मासूमियत से उसे देखती रही. विशाल कुछ कीमती न ढूंढ़ पाने के कारण छटपटा रहा था ... मुस्कान ने आँखों से इशारा में ही पुछा कि क्या हुआ... तब विशाल धीरे धीरे सोचते हुए बोला - "विश्वास को दृढ बनाना एक चुनौती है , एक परीक्षा है और शायद इसी परीक्षा में सफल होने पर हमें वो मिल जाए जो हमें चाहिए." विशाल अभी भी प्रश्न भरी नज़रों से मुस्कान को टटोल रहा था... मुस्कान कुछ उलझी उलझी थी अचानक से बोली -  "पता नहीं..."
ये सुनते ही विशाल और मुस्कान दोनों खिलखिलाकर हंस दिए... 

Sunday, June 12, 2011

घुटन











रौशनी और ताज़ा हवा के लिए
हल्का सा खोला था 
ये दिल का दरवाज़ा

पर सच पूछो तो अब...

पहले से भी ज्यादा  दम घुटता है . 

Wednesday, June 8, 2011

खिड़की के कांच से आती 
पीली रौशनी में
कमरे के खालीपन को 
थकी आँखों से नापती रहती हूँ...
जीवन निरुद्देश्य सा लगने लगा है.
इसीलिए नहीं की किस्मत साथ नहीं, 
पर अब वे दिन नहीं रहे
जब प्यार के दो शब्द ---
दिन की खुराक मिला करती थी.

Monday, June 6, 2011

विश्वास

हर रात वही प्रश्न - 
आँखों में आंसू ,
और ये ज़िन्दगी थमी हुई सी लगती है - 

मैंने तो सिर्फ विश्वास ही किया था न.

Saturday, June 4, 2011

बहुत कोशिश कि

बहुत कोशिश कि 

खोला करूँ शाम को खिड़कियाँ
क्यूंकि सूरज कभी डूबता नहीं

एक परछाई बनी रहूँ
क्यूंकि साए कभी कुछ कहते नहीं

वो लकीरें मिटा दूं
तुम्हारे चेहरे से जो तुम्हारी नहीं ,और मेरी नहीं

ओर वो तारे भी
जो कभी सपने बन गए थे हमारी आँखों के



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