Friday, August 26, 2011

तुम्हारे जन्मदिन पर


"मैं तुम्हारे जन्मदिन पर 
क्या दूं?
कोई शब्द, कविता
या..."


कुछ नहीं!
बस
तुम्हारी यादों से रहित 
 एक मौन कि गूँज . 

P.S. - On your birthday

(Image source : Google)

शहर


किसी ने सच कहा था                        
कभी किसी शहर से दिल मत लगाना
तुम आगे न भी बढोगे
शहर पीछे छुट जाएगा...

*...............................*


ग़ज़लें, कुछ नज्मे
और कहीं कुछ त्रिवेनियाँ
बिखरी पड़ी हैं
उठा लेना उन्हें 
सूरज ढलने से पहले
सुना है
रात बड़ी गहरी होती है इस शहर में.
*..............................*



Thursday, August 25, 2011

रूह

कितना गहरा और उज्जवल 
शब्द है यह 
- रूह!
ऐसा लगता है,
जैसे , 
हवा से भी हल्का
एक सफ़ेद जिन्न
शरीर से मेरे निकल कर 
इस कठोर धरती को चीरता हुआ
किसी खोज में निकल पड़ा हो...                                                      
एक अनंत खोज में...                                                                
Text selection Lock by Hindi Blog Tips