Saturday, April 24, 2010

पंखो का शरीर

मेरे कमरे के सामने वाले
घर के पीछे
यानी मेरे कमरे के सामने
एक कबूतर के जोड़े ने गीज़र के उपर
डेरा बसाया है ----

कई दिनों बाद आज
मैंने उन्हें गौर से देखा -
कबूतरी परेशान है
कबूतर लाचार है
कबूतरी पेट से है
कबूतर उसके पास है
कबूतरी को एक पल चैन नहीं उसके पंखो में कुछ काट रहा है
कबूतर बिलकुल शांत है
कबूतरी अपनी चौंच से कोशिश कर रही है
कबूतर चुप चाप बैठा उसे ताक रहा है
क्यूंकि कबूतरी परेशान है ,
मुझे लगता है कबूतर थोडा गंभीर है,
में खड़ी खड़ी लाचारी से सब कुछ देख रही हूँ
उससे भी बढ़कर महसूस कर रही हूँ.
रह रह कर "अमेरिकेन ब्यूटी " फिल्म का हीरो याद आ रहा है,
संसार में असंख्य खूबसूरती बिखरी हुई है,
ओर फिर खूबसूरती सिर्फ ख़ुशी से ही तो पैदा नहीं होती न.

कबूतरी उसके पंखो के शरीर में
अपनी चोंच चुभा चुभा कर खुद को आराम दे रही है...

मुझे उसका पंखो का शरीर लुभा रहा है ,
ओर एक अरसे तक में उसे यूँही एक तक देखती हूँ....

3 comments:

  1. वो 'अमेरिकन ब्यूटी' हमारी इस 'इंडियन ब्यूटी' से भी बढ़कर होगी क्या?

    मुझे नहीं लगता!जो पक्षियों की भावनाओं का भी विश्लेषण इतने दिल से कर देती है वो साधारण तो ना होगी!



    कुंवर जी,

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  2. बेहतरीन रचना .......बेजुबां पक्षियों की भावनाओं को बहुत गहराई से व्यक्त किया है आपने .

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  3. अरे वाह.. ब्लाग का तो कायाकल्प हो गया है.. बधाई हो मैडम.. :)

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