Sunday, June 12, 2011

घुटन











रौशनी और ताज़ा हवा के लिए
हल्का सा खोला था 
ये दिल का दरवाज़ा

पर सच पूछो तो अब...

पहले से भी ज्यादा  दम घुटता है . 

6 comments:

  1. iLIKE

    Same intensed
    the pain
    on which
    I balm' d
    to soothe

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  2. Im sry didnt get you this time?

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  3. किसी कवी की ये कविता याद दिलाती रचना है

    "किसी मौसम का झोंका था
    जो इस दीवार पर लटकी हुई तस्वीर तिरछी कर गया है
    गए सावन में ये दीवारें यूं सीली नहीं थी
    न जाने इस दफा क्यूँ इनमें सीलन आ गयी है
    दरारे पद गए है और सीलन इस तरह बैठती है
    जैसे खुश्क रुखसारों पे गीले आंसू चलते हैं"

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  4. एक शब्द इन पंक्तियों के लिए... गहराई!

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  5. Prateek thanks :)
    But I guess your onw word is suitable for the lines shared by Anonymous. :)
    Maine jo likha hai wo to paani pr beh rahe tinke jaisa hai , gehraai ki to baat hi alag hoti hai.

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  6. Thanks Anon... meri rachna aisi kavita yaad dila den , mere liye bahut badi baat hai.

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