Friday, August 26, 2011

शहर


किसी ने सच कहा था                        
कभी किसी शहर से दिल मत लगाना
तुम आगे न भी बढोगे
शहर पीछे छुट जाएगा...

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ग़ज़लें, कुछ नज्मे
और कहीं कुछ त्रिवेनियाँ
बिखरी पड़ी हैं
उठा लेना उन्हें 
सूरज ढलने से पहले
सुना है
रात बड़ी गहरी होती है इस शहर में.
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3 comments:

  1. हाँ जी.. शहर से दिल लगा के लोग समझते हैं की "अपना" शहर है..
    और शहर ऐसी सोच पर खड़ा-खड़ा हँसता है कि मैं तो केवल कब्रों का ही शहर हूँ और एक दिन तुम भी उस कब्र के हिस्से हो जाओगे.. मेरे नहीं..

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  2. लाजवाब ......प्रस्तुति

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