Sunday, November 13, 2011

अज्ञात


अज्ञात !!
ये तुम्हारे लिए
तुम्हारे उन शब्दों के लिए
जिन्होंने मुझे दो पल के लिए छुआ...

हाँ अब तुम नहीं हो,
पर हो आस-पास
क्यूंकि हर ख़ास एहसास कि तरह
हो तुम भी एक अज्ञात. 


2 comments:

  1. सारे लम्हें, सारे पलछिन
    हर बात पता तू रखता हैं
    मेरे अन्दर धड़कन धड़कन
    ख्वाबों संग ही पलता हैं
    आइनों से पूछे पगला,
    ...अज्ञात भला तू लगता हैं?

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  2. aainon se pooche 'pagli'
    agyaat bhala tu 'kya' lagta hai?

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