Tuesday, October 27, 2015

खामोशियाँ आवाज़ हैं , इन्हे सुनने तो आओ कभी

यहाँ मैं एस जे बन कर नहीं लिख रही , न ही ऐंजल या जेनी बन कर।  यहाँ मैं , मैं हूँ अपने असली नाम के पीछे भी छिपी असली मैं।  मैं जानती हूँ , यहाँ तुम मुझे नहीं पढोगे न ही वो।  मेरा उससे ज़िन्दगी भर का रिश्ता है।  पिछले जन्म में भी कुछ ऐसा ही करीबी रिश्ता रहा होगा।  पर अक्सर सोचती हूँ तुमसे पिछले जन्म का ऐसा क्या रिश्ता है की , इस जन्म है भी और नहीं भी।  होकर  भी नहीं है और नहीं होकर भी है।

डायरी में पुरानी लिखी कुछ लघु कहानियाँ पढ़ रही थी।  जो दरअसल कहानियाँ न होकर हमारे बीच घटे भावनात्मक किस्से ही थे।  कहानी एक बहुत खूबसूरत कला है सच।  सच ! मैंने इस कला में अपनी बेहद दिली यादें संभाल राखी हैं, जिन्हे मेरे अलावा कोई अनकोड नहीं कर सकता।  मेरे और सिर्फ तुम्हारे सिवा।

एक बात कहूँ।  मेरे लिखने के इंस्पिरेशन भी तुम हो और यह चाहत कि  शायद कभी तुम मुझे पढ़ो , और.… बस ऐसे ही खामोश रहो।


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