Thursday, January 7, 2016

कृष्णं शरणम् ममः - 2015 ने जो सिखाया


       ज़िन्दगी में हर पल सीखने का पल होता है।  कभी आप मुस्कुराना सीख रहे होते हैं कभी खिलखिलाना , कभी चलना तो कभी आसमां में उड़ान भरना , कभी जीने की कला तो कभी जीवन को और सुंदर बनाने की कला।  मेरे अनुसार व्यक्ति को सबसे पहले जीवन जीने की कला सीखनी चाहिए, और इसे हर पल सीखते रहना चाहिए, क्यूंकि जीवन के हर मोड़ पर नयी समस्या , नयी चुनौतियाँ हमें और तराशने के लिए हमारा इंतज़ार कर रही होती हैं।

       2014 फरवरी में शादी के बाद मेरे सामने नए लोग , नया माहौल था जिसमे एडजस्ट करने का सफर  बहुत मुश्किल भरा था।  2015 का भी पूरा  साल अपने बाहर और भीतर कई परिवर्तन करने में , कई बातें सीखने में  गुज़र गया किन्तु 2015 में मैंने पाया की मैं पहले से अधिक स्थिर , समझदार , शान्त , आशावादी और अपने लक्ष्य के लिए अधिक प्रयत्नशील हुई हूँ। 

तो पांच बातें जो मैंने वर्ष 2015 में सीखीं और जीवन में अपनाईं वे हैं  -


१. दिमाग को क्लीन रखना -

      लोगों की कही हुई बातों को दिल से लगा कर दिमाग में स्टोर करने से दिमाग डस्ट बीन बन जाता है। और ये मेरा दिमाग है कोई डस्ट बीन तो नहीं। आगे चल कर दिमाग की यह गन्दगी कई रोगों को जन्म देती है। इसीलिए मैंने कई तरीके अपनाये , मन को समझाना सीखा जिससे मैं फ़ालतू बातें भूल कर अच्छी बातों को दिल और दिमाग में जगह दे सकूँ।

२. हरी करे सो खरी - 


        अर्थात ईश्वर जो करता है हमारे अच्छे के लिए ही करता है।  मैं पहले से यह मानती थी किन्तु २ साल संयुक्त परिवार में रहने के बाद मुझे और अच्छा अनुभव हो गया की भगवान जो करता है  वो हमारे लिए बेस्ट है।

३. कृष्णं शरणम् ममः -


      जीवन में कई समस्याएं ऐसी आती हैं की हम कितना हाथ पैर मार लें , हमारे पास उसका कोई समाधान नहीं होता।  ऐसे में कई लोग  डिप्रेशन या अन्य बीमारियों के शिकार हो जाते हैं।  जब लगता है की समय ही इस परिस्थिति से निकाल  सकता है , हमारे हाथ में कुछ नहीं है तब इष्ट देव की शरण में जाना, खुद को इष्ट देव को सौंप देना सबसे बड़ा कारगर उपाय है।  मैंने भी मुश्किल परिस्थितियों में यही उपाय अपनाया और  "हे कृष्ण मैं आपकी शरण में हूँ , आप जैसा ठीक समझें वैसा करें " इसी प्रार्थना को दोहराया है।

४. कर्म के बंधन को समझना -

     ध्यान से सोचने पर लगता  है की पति-पत्नी से लेकर सारे रिश्ते कर्म के बंधनों से जुड़े हैं।  रिश्तों के माध्यम से हम कर्मों का हिसाब चूका रहे हैं।  ब्रह्माकुमारीज़ की सिस्टर शिवानी कहती हैं कि , कोई आपके साथ बुरा करता है तो यह कह कर छोड़ दो की - इट्स ओके।  पिछले जन्म का हिसाब चुकता हुआ।  किन्तु आपके रिएक्ट करने से कर्म का बंधन बनता जाता है।  इसे  खत्म करने के प्रयास करने चाहिए न की बढ़ाने के ।

५. लक्ष्य को विज़ुवलाइज़ करना -

     जब आपको लगता है की आप अपनी मर्ज़ी से अपनी ज़िन्दगी में कुछ परिवर्तन नहीं कर सकते , तब अपनाइये विज़ुअलाइज़ेशन की थेरेपी।  आप जो ज़िन्दगी में चाहते हैं , जैसा चाहते हैं , बस उसी के बारे में सोचिये, डे-ड्रीम करिये, उस तस्वीर को अपनी और खिंचीये , अट्रेक्ट कीजिये , एक दिन वो तस्वीर आपकी असल ज़िन्दगी बन जाएगी।  हाँ मैं यही करती हूँ।  हर दिन हर पल मैं उन चीज़ो के बारे में सोचती हूँ जो मुझे अपनी ज़िन्दगी में चाहिए और मैं जानती हूँ की इतना चाहने पर एक दिन वे मुझे जरूर मिलेंगी।



वर्ष 2015 को विदाई 


नोट - yah post Indi Spire ke topic-  What are the 5 Lessons 2015 has taught you?  ke reply me likhi gayi hai. 




        

2 comments:

  1. Each and every point is true. Difficult to implement but true.

    Very nice prompt by you, Ojasi. And a very good post on it.

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