Thursday, December 30, 2010

सपने

दूर पहाड़ी से उगता हुआ सूरज
खिलती धूप
और उसकी चमक से
रौशन होता वो लकडियो वाला घर
आस-पास हरियाली
और नीचे बहती हुई वो सुरीली नदी...

सपने कितने रंगीन होते हैं न ,
और शायद अंधे भी
जिन्हें बीच में फैलती  खाई नहीं दिखती
पीले झड़ते पत्ते
और सूखती नदी नहीं दिखती...

2 comments:

  1. वाह!

    क्या खूब शब्द-चित्र बनाया है...

    और बाद में.....

    ऐसा क्यों भला.....??? सुखी नदी महसूस कर आँखे नम होती सी महसूस हुई!

    कुंवर जी,

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  2. सपने कितने अंधे होते हैं ना ...
    सपने तो सपने ही होते हैं ना !

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