Tuesday, September 20, 2011

दो तरफ़ा प्यार

यहाँ दुःख 
- सुख,
प्रशंसा
और प्रोत्साहन भी एक तरफ़ा है 

ये कैसा दो तरफ़ा प्यार है.


4 comments:

  1. यह तो सच्चाई है जीवन की..
    सब कुछ एक तरफ़ा है.. कहीं न कहीं स्वार्थ अपना काम धीमे से कर ही जाता है..
    विडम्बना! पर सच भी...

    आभार
    तेरे-मेरे बीच पर आपके विचारों का इंतज़ार है...

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  2. कुछ दो तरफ़ा भी है....पर वो क्षणिक है....आपने उसे क्षणिका बना दिया :)

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  3. और हां.....आपका ब्लॉग बहुत ही खुबसूरत है... :)
    आकर अच्छा लगा ...

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