Tuesday, December 8, 2009

बेनाम कविता !

आपके लिए,

समय से परे हट कर देखो
भूत , भविष्य वर्त्तमान से दूर
एक अलग सा समय है
वो समय महसूस होता है
उन दो मस्तिष्क को उन दो दिलों को
जो मिल जाते हैं
बावजूद दूरियों के
बावजूद खामोशियों के
बावजूद पहरों के
वो फिर अलग संसार बनाते हैं
पीले झाडे पत्तों से सपनो का आशियाँ बनाते हैं
सच को वे मापते नहीं उसकी परवाह नहीं करते
सच भी अधुरा होता है वे ये जानते हैं
झूट को ही सही कल्पना का नाम देकर
बड़ी प्यारी सी नाजुकता से दिल बहलाते हैं
पर आखिर वे अपने बनाये संसार में खुश रहते हैं
किसी का दिल नहीं तोड़ते
किसी की हंसी नहीं छीनते
झूठे धर्म या प्रेम के नाम पर
लड़ाई नहीं करते किसी को लुटते नहीं
इस समय से दूर इस समय से परे
कुछ खोजते हैं
कुछ तलाशते हैं
वो क्या है ये तो भला
वो दो दिल ही जानते हैं.

आपकी,
..........

3 comments:

  1. पीले झाडे पत्तों से सपनो का आशियाँ बनाते हैं
    सच को वे मापते नहीं उसकी परवाह नहीं करते
    सच भी अधुरा होता है वे ये जानते हैं
    झूट को ही सही कल्पना का नाम देकर
    बड़ी प्यारी सी नाजुकता से दिल बहलाते हैं

    agar koi sach aur jhooth ko itni baariki se samajh le to ye samay aur wo samay ek ho jaye... to ye jahan aur wo jahan ek ho jaye...to dharti aur swarg ek ho jaye

    Bahut pyaari line... bahut badhai

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  2. mujhe bahut khoobsurat lagi aapki kavita...man ke nazdeek

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  3. thank you :) ... ye encouragement bahut hai do kadam aur badhane ke liye :)

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