Saturday, February 20, 2010

तनहा सफ़र में रात के तारे

जब भी रात के सफ़र में होती हूँ कुछ पंक्तियाँ बन ही जाती हैं... अभी जब में अपने घर से जयपुर आई तो  तारो भरी रात को देख कर ये पंक्तियाँ दिल में उतर गयी जिन्हें मैंने अपने मोबाइल में सेव कर लिया था ---


काली चुनरी में जड़े हुए हीरे से लगे 
मुझको ये रात के तारे 


रात भर  बैठी  गिनती  रही 
क्यूंकि जानती हूँ कटता नहीं ये तनहा सफ़र यूँही


एक तारे से दुसरे तारे के बीच सपनो के जाल बुनती रही 
क्यूंकि जानती हूँ सपनो के बूते भी जी जा सकती है एक लम्बी उम्र .

8 comments:

  1. वाह !!.....बहुत खूबसूरत पंक्तियाँ से सजया है आपने ये कविता

    ReplyDelete
  2. बहुत ही सुन्‍दर शब्‍द दिल को छू गये ।

    ReplyDelete
  3. असल जिंदगी में जब जीना दुभर हो जाता है
    तो सपनो में ही जीए जाने का ख्याल आता है
    सच्चाई को काफी करीब से देख ले गर कोई
    उसकी हर बात कविता,हर ख्याल शेर बन ही जाता है....


    आपकी पंक्तिया सच्चाई के बहुत करीब लगी जी
    कुंवर जी,

    ReplyDelete
  4. thank u kunwarji ...
    sapno mein jiya tab bhi jaata hai jab zindagi bahut hi asaan aur zameen per ho aur aapke khwab aasmaan ke hoon... :)

    ReplyDelete
  5. awesome last line.
    (and Gogh wld hav liked it too :))

    ReplyDelete
  6. thank u mohit :) ... Got a new thing to search upon...!!!

    ReplyDelete

Text selection Lock by Hindi Blog Tips