Monday, May 24, 2010

अँधेरा और रौशनी


 तुम इंग्लिश लिटरेचर पढ़ रही हो न ---हाँ ! --- एक बात बताओ --- पूछो ! --- शेक्सपियर इतना महान कैसे बना? --- उसका जीवन मुश्किलों से भरा था पर उसने ज़िन्दगी के अँधेरे से लड़ कर रौशनी को पा लिया था यही कारण है कि उसके नाटक हमें घोर अँधेरे कि गुफा का दर्शन कराते हुए रौशनी का रास्ता दिखा देते हैं--- हम्म! ... तो क्या हार्डी को एक असफल और निचे दर्जे का साहित्यकार मानना चाहिए?--- नहीं! मुझे नहीं लगता कि वह असफल है या किसी भी दृष्टि से शेक्सपियर से निचे दर्जे का साहित्यकार है--- और वह कैसे? ---- उसके उपन्यास के पात्र अँधेरे के तल को छू जाते हैं हालांकि वे रौशनी तक नहीं पहुचते पर वे पूरी कोशिश करते हैं उस रौशनी को पाने कि... इसी बुरी हार में उनकी जीत है ... और  इसी कोशिश में वे अपने भीतर कि किसी रौशनी से मिल पाते हैं --- हम्म! --- आइ होप तुम मुझे समझ रहे हो--- हाँ! में पूरी कोशिश कर रहा हूँ--- (जोर से हँसते हुए) हम्म... मेरी नज़र में हमेशा कोशिश करते रहना ही सफल और सच्चा होना है --- (मुस्कुराते हुए) हम्म! में समझ गया.

7 comments:

  1. roshani keval andhere se duri ka paryay na hokar ek nital me basi prerna hain. kyoki chamtkarik roop se ham us andhre se duri banae rakhne ki kasmkash me hi roshni ke darshan kar pate hain.

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  2. @ Anonymous - Thanks for your comment --- aapne bahut badi baat bahut hi kam shabdo mein khubsurati ke saath keh di :) ....

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  3. खूबसूरत प्रविष्टि ! आभार !

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  4. sundar kasaav tha kaafi lekhan me...

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  5. सही कहा..कोशिश करने वलों की हार नहीं होती.

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  6. @dilip - Thank you for comment :)

    @ Udan tashtari - :)

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