Sunday, March 20, 2016

वो एक आशिक था



वो अचानक से कहने लगा।  रूहानी थोड़ा सुनती, थोड़ा समझने की कोशिश करती , उसकी वो अजीब बातें ।  वो कहता, तुम्हारी याद आती है।  तुमसे जुडी हर चीज़ मुझे यहाँ - तहाँ दिखाई देने लगती है।  वो तुम्हारा पसंदीदा शब्द "विश्वास" तो न जाने क्यों मेरे पीछे सा पड़ गया है। कहते हैं न, जिससे प्यार हो उससे जुडी हर चीज़ से प्यार हो जाता है।  रुहानी को सुन कर अचम्भा - सा होता है। वो फिर भी कहता जाता , पागलों की तरह जैसे मानो जहाँ हो वहाँ आकाश में चिल्ला रहा हो , की आज मैं भरा-भरा सा हूँ, खुला-खुला सा हूँ , जी करता है ये सब प्यार लूटा दूँ किसी पर। रूहानी आँखे बंद कर के महसूस करना चाहती है।  वो फिर अचानक से पूछता है  , तुम्हे नहीं पता था ये? रूहानी धीरे से कहती है, "नहीं।"  "सच ! नहीं पता था?" " नहीं ! बिल्कुल भी नहीं। " "मुझे लगता था तुम मुझे जानती हो। " रुहानीअपने मन से पूछती है , "क्या मैं उसे जानती हूँ ?" मन उसी की तरह भोला , भुला , भटका हुआ -सा कहता है , "मुझे तो इतना ही पता था, की वो एक आशिक था। " रूहानी खोयी - सी सोच में पड़ जाती है , सच क्या ! और जो  मैंने अभी-अभी एक लौ-सी उसमे जो देखी है वो क्या है ?

4 comments:

  1. Replies
    1. sach ? utni khoobsurat to nahi hai shayad...

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  2. सचमुच,रूहानी बहुत सुन्दर नाम है, पर उसका चिंतन, डर, उसके नापतौल तो नाम से भी ज्यादा खूबसूरत है।
    ये पल, हमेशा रूहानी के नज़रिये से याद रहेगा

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