Thursday, February 24, 2011

सुनो!

रुखा सुखा जीवन
हुआ मरणासन्न मन.
सुनो! मुझे अपने शब्दों से एक बार फिर सींचो,
प्रेम का पानी ,
डांट की खाद,
और धुप का मार्गदर्शन दो ,
मुझे अपनी कल कल बहती हंसी से 
एक बार फिर सींचो.
सुनो! मुझे अपने शब्दों से एक बार फिर सींचो. 

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