Tuesday, February 21, 2012

इंतज़ार

 



आइ एम रिअली वेरी सोरी , मैं उस दिन घर नहीं आ सका.
नहीं... कोई बात नहीं... मुझे इंतज़ार करना पसंद है
ओह.. सच तुम मेरा इंतज़ार कर रही थी ?
हाँ... शायद... या इस बात का कि तुम आओ ही न और ज़िन्दगी बस यूँही एक इंतज़ार में कट जाये...
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"ज़िन्दगी क्या है?"
"एक लम्बा इंतज़ार ! प्यार... और फिर बिछड़ जाने का डर ..."

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कभी खुद को रोक नहीं पाती और पतझड़ कि टूटी टहनी सी गिर पड़ती हूँ...धीरे से खुद से पूछती हूँ... क्यूँ तोडा वो मौन, वो अंतहीन इंतज़ार...?
... फिर एक हवा कंपकपाती छु कर निकलती है... भीतर ही कहीं से आवाज़ आती है...इंतज़ार का ही नया एक अध्याय शुरू करने के लिए... 




4 comments:

  1. यह इंतज़ार भी बड़ी उधेड़बुन वाली चीज़ है.. बहुत परेशान करती है..

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  2. lekin hausla bhi deti hai... ek roshni bankar hamesha saath chalti hai... log saath chhod sakte hain, intezar nahi.

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  3. जिन जिन प्रेम का अंतर जाना
    तिन तिन पलक राह बिछाना जाना
    जे जे पलक राह बिछाना जानी
    ते ते प्रीत का हासिल जानी
    जे कोई प्रीत का हासिल जानी
    ते ही प्रभु, तोरी मर्ज़ी जानी

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  4. Golden words for me Kapil. Thank you.

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