Sunday, November 15, 2009

कुछ खास तो नही बस यूँ ही है -

- तुम हँसना और हँसते रहना,
कहकर एक मुस्कान दे गया
वो अजनबी सा दोस्त
आज दिल पैर दस्तक दे गया

-आँखें मेरी आइना तो नही
फिर भी उसने कुछ कहा नही
दिल ख़ुद को समझाता रहा
नही वो बेवफा नही , वो बेवफा नही

-खुशी भी और गम भी
ये साथ साथ क्यूँ चलते हैं
आँखे कुछ कहती नही
बस आंसू ही झरते हैं

-रंग जाने क्यूँ उसे बहुत पसंद थे
कई रंगों वाला कुरता वो पहना करती थी
वो आँखे कितनी सुंदर थी
दुनिया का हर रंग अपने में भर लेती थी

कुछ खास नही बस बासी त्रिवेनियाँ -

कहीं पढ़ा था मैंने
किताबों से अच्छा कोई दोस्त नही

पर आज कल दोस्ती मेरी कलम से हो गई है

- दिल क्या है ?
घर के स्टोर का एक कोना सा है....तुम आना कभी!

रौशनी की यहाँ कुछ कमी मुझको लगती है


3 comments:

  1. wow i am amazed, u write more beautifully in hindi , keep going :)

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  2. दिल क्या है ?
    घर के स्टोर का एक कोना सा है....तुम आना कभी!
    रौशनी की यहाँ कुछ कमी मुझको लगती है
    ---
    बहुत खूबसूरत है ओजसी...। दिल का ये कोना ना रहे खाली...यही दुआ. अच्छा है!

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