Thursday, November 12, 2009

चार पंक्तियाँ

चाँद को देखती हूँ तो सोचती हूँ
क्या किस्मत उसने पायी है
खूबसूरती इतनी है मगर
दूर तलक फैली तन्हाई है

1 comment:

  1. बहुत खूब...चांद की ख़ूबसूरती और ग़म का कालापन.

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