Wednesday, November 18, 2009

कुछ पंक्तियाँ

दिल में दर्द है
दिल में सवाल हैं
दिल में एक दरवाजा है
दिल में एक खिड़की है
दिल से बहार झाँकने पर वो चाँद दीखता है
दिल में अँधेरा छाया है
इस दिल में दुबक कर सोया जा सकता है
दिल में अकेले में रोया जा सकता है
इस दिल में कई बात छिपी है
दिल अक्सर खामोश रहता है
दिल कभी चुपके से कुछ कहता है
दिल की दीवार का रंग लाल है
इस दिल का बहुत बुरा हाल है
दिल मेरा बेचारा है
दिल कमज़ोर और हारा है ...


1 comment:

  1. उम्मीद बाक़ी है, क्योंकि दिल में एक खिड़की है...। सुंदर अतुकांत कविता!

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