Thursday, November 19, 2009


हँसते रहना

खिलखिलाते रहना

दो कदम पर ही घर है मेरा

ऐसे ही साथ निभाते रहना

कभी हो जाऊ नज़रों से ओझल

मेरे गीत सदा गुनगुनाते रहना

चाँद सिक्कों के लिए नही जीते ज़िन्दगी अपनी

ख्वाब सोती आँखों को दिखाते रहना

आंसुओ को पीने में मज़ा ही क्या है

प्रेम की अमृत बूँद पिलाते रहना

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