Sunday, November 22, 2009

अधूरे चित्र

कुछ अधुरा अधुरा सा
आज लग रहा है
सब कुछ पिछला भुला कल
याद आ रहा है...
वो दुनिया जो मैंने बनाई थी
एक पेंटिंग सी थी...
पेंटिंग!
आह! वो पेंटिंग्स , वो चित्र
जो बड़े ही मन से बनाये थे मैंने
कोई कलाकार नही थी में
द्रोइंग में खास दिलचस्पी भी नही थी
पर एक जूनून सा था
उन कई रंगों में
एक सुकून सा था
जाने क्या सोच कर वो चित्र बनाये
एक के बाद एक अधुरा छोड़
कई चित्र बनाये
आज भी स्टोर रूम के किसी कोने में
रखी हैं वो पेंटिंग्स...
पेंटिंग!
हाँ! पेंटिंग की तरह ही
ज़िन्दगी हो गई है मेरी
या शायद में उन अधूरे चित्रों सी हो गई हूँ
स्टोर रूम में कैद
पुरे होने की तलाश में
कहीं खो सी गई हूँ...

4 comments:

  1. sundar kavita....

    aaj is kavita ke jawaab me koi comment nahi likhoonga....maine ek baar ek saathi ko aawaaz dee thee kuchh chitra poore karne ke liye....unhi panktiyon ko phir yaad kar raha hu...dekhiyega,...shayad aapki kavita ka vistaar ho saken....

    साथी
    कहां हैं वो चित्र
    जो बुनने थे तुम्हें
    भरने थे जिन रेखाओं में रंग
    देखता हूं वो उंगलियों से छनकर काग़ज़ों तक उतर नहीं पाईं
    मन के काले गड्ढों में गहरी हो रही और कालिख
    क्या यही थी रेखाओं की नियति
    उलझनों में तब्दील हो जाना
    अलमारी पर तह किया रखा रह गया है कैनवॉस
    फ्रेम की लकड़ियों पर लग रही दीमक
    साथी
    मन को तो नहीं लगा घुन
    बचाकर रखना ज्वार
    उफान मारे तो संजोना
    उलटने, छलकने न देना
    आंसू बनकर
    पता है ना
    तुम्हारे रंग छंद बनकर उतरेंगे कविताओं में
    शब्द बन बुनेंगे कहानियां
    उम्मीद फिर जन्म लेगी
    मारेगी किलकारियां
    खूब ख़ूबसूरत होगा कल
    बस, संभालो अपने आपको
    छोटी तुनकमिज़ाजी से कहीं बड़ा है प्यार

    bas itnaa hee....subhkamnayen....

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  2. ye toh bahut hi sunder hai ... :)

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  3. sundar kavita ojasi ji..!!
    humara jeewan bhi ek adhuri painting hi hoti hai..
    jo..waqt aur yadon ke rangon ke saath...
    alag-alag bimb banati hai..

    meri ek Nazm ki chand linen hain...
    na jane kitne yadon ki badi khamosh
    tasveeren meri ankhon ke desi camre ne
    pal-ba-pal kheenchi..
    Na jane wo meri tasveeren kab tak dhul ke aayengi..???

    kabhi mere blog par bhi aaiyega swagat hai..
    http://www.dankiya.blogspot.com/

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