Monday, November 16, 2009

जेसमीन




जेसमीन


लोग भले ही उसे ध्रुव तारा बुलाते हो जेसमीन उसे लेरी के नाम से बुलाती थी । लोगों को वह टिमटिमाता सुंदर तारा दीखता हो पर जेसमीन के लिए वो एक हेंडसम बॉय था जिससे वो बहुत प्यार करती थी और जो उससे बहुत प्यार करता था । कितनी सुंदर कल्पना है न ! पर ये कल्पना हर रात कुछ पलों के लिए सजीव हो जाती थी। प्यार भरी आंखों से जेसमीन उसकी तरफ़ देखती है और लेरी उसे अपनी तरफ़ खींच कर बाहों में लेकर बहुत प्यार करता है - और दो पल ऐसे ही गुज़र जाते हैं। पर उन दो पलों का ये एहसास - एक तनहा कल गुजरने के लिए काफ़ी होता है।



अगले दिन उसके होठों पर मुस्कराहट होती है और दिल में इंतज़ार - फिर से उन्ही कुछ पलों को जी भर के जीने का।

3 comments:

  1. tats what life is to enjoy small small moments and not wait for one big moment to arrive, bcoz it will never come :)

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  2. ये क्या धोखा नहीं है...खुद को ही धोखा देने की कोशिश...पर प्यार करने वाले कहां सोचते हैं इतना...वो तो इक मुस्कान के लिए कर देते हैं ज़िंदगी फ़ना. लघुकथा अच्छी है पर कुछ ज्यादा ही लघु है...थोड़े विचार और अहसास और होते तो और अच्छा होता...नहीं क्या?

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  3. shayad app sahi hain :)
    koshish karungi ki aur vyakhya kar sakhu.

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