Friday, November 13, 2009

तीन और त्रिवेनियाँ

- छोड़ दिया है अंधेरे की फिक्र करना मैंने
ऊँची ऊँची अट्टालिकाओं से अब आकाश जगमगाता है

अमावस्या भी अब तोह ईद का चाँद हो गई है

- सूखे पत्तों में दिन भर ढूंडा था
तेरी यादो को समेत कर ले जा रही थी

एक बार फिर उस हवा ने मेरा सब कुछ चीन लिया

-अकेले रहते रहते सब एहसास मर चुके थे
घर के कोने कोने से मिलकर लगा - में जिंदा हूँ

बहुत दिनों बाद किसी ने आज दिल दुखाया है

2 comments:

  1. उदास करती हैं ये पंक्तियां. दर्द के दस्तावेज।

    ReplyDelete
  2. bahut umda peshegi hain aapki :D

    ReplyDelete

Text selection Lock by Hindi Blog Tips